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Friday, May 10, 2013

रंग


रंग

वो कहते हैं मैं बदनाम हो गया हूँ,
उनकी गली में आम हो गया हूँ.

मेरा आना भी उन्हें नागवार गुजरता है,
उनके दरीचे का पर्दा भी नया लगता है.

छत के फूल भी अब मुरझाने लगे हैं,
सीढ़ियों पर भी अब जाले लगने लगे हैं.

बदल दिया है समय आने जाने का,
नज़र मिलने पर भी रंग अब बदलने लगे हैं.

Copyright @csahab 

Wednesday, January 5, 2011

यादों का घरोंदा

आपके लिये कुछ लिखा है, 
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ना नज़रे मिलाते है न झुकाते हैं,
देख कर उन्हें बस देखते जाते हैं ।
ना बोल पाते है न चुप हो पाते हैं,
देख कर उन्हें बस गुनगुनाये जाते हैं ।  
ना कुछ लिख पाते हैं न कुछ मिटा पाते हैं,
देख कर उन्हें बस लकीरें खींच पाते हैं ।  
ना चल पाते हैं न बैठ पाते हैं,
देख कर उन्हें ठगे से रह जाते हैं ।  
ना पास आ पाते हैं न दूर जा पाते हैं,
उनसे नज़रे मिला कर झुका जाते हैं ।
ना जाग पाते हैं न सो पाते हैं,
उनकी यादों में मदहोश हो जाते हैं ।
ना हँस पाते हैं न रो पाते हैं,
मुकुराते हुए मेरे आंसू बाहर आते हैं ।
ना मिलने कि खुशी न खोने का गम खाते है,
उनकी यादों को सीने मे जलाते हैं ।
ना सुन पाते हैं न समझ पाते हैं,
पर उनकी होंठों कि चाल समझ जाते हैं ।  
ना चाँद से न सूरज से दोस्ती जताते है,
मेरी तो बस उनसे है हस्ती यही बताते हैं ।
ना राम जपते हैं न रहीम पढ़ते हैं,  
दिल कि गहरायी मे वो बसते हैं ।
ना इंकार करते हैं न इकरार करते हैं,
उनके साथ वक्त बिताने का इंतज़ार करते हैं ।
ना उनका नाम लेते हैं न बदनाम करते हैं,
अपने जेहन मे चर्चा-ए-आम करते हैं ।  
ना काश करते हैं न उफ्फ करते हैं,
जितने पल बिताये साथ मे आज भी महसूस करते हैं ।   
ना डूब पाते हैं न तैरना सीख पाते हैं,
प्यार में दौर ऐसे भी आते हैं ।
ना उड़ पाते हैं न गिर पाते हैं,
प्यार को देख कर दूर से रो जाते हैं ।
ना सांस आती है न सांस जाती है,
बस और बस उनकी याद आती है ।
©csahab 

Saturday, November 27, 2010

चंद अल्फाज़ तेरे लिये

कुछ पंक्तियाँ बस के यात्रा के दौरान मन में हिलोरे ले रही थी सोचा लिख लू आज आपके सामने प्रस्तुत है आशा करता हूँ आपको अच्छी लगेगी। इसको लिखे के पीछे कोई निजी अनुभव नहीं पर हाँ देखे हुए जरूर है । 

वो कहते हैं बदनाम हो गया हूँ
उनकी गली में आम हो गया हूँ।

मेरा आना अब उन्हें नागवार गुजरता है
उनके रोशनदान का पर्दा नया लगता है।

छत के फूल भी मुरझाने लगे हैं
सीढ़ियों पर जाले लगने लगे हैं।  

देख कर हमें रंग बदलने लगे हैं
हम भी अब उन्हें भूलने लगे हैं।  

© Csahab