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Friday, May 10, 2013

रंग


रंग

वो कहते हैं मैं बदनाम हो गया हूँ,
उनकी गली में आम हो गया हूँ.

मेरा आना भी उन्हें नागवार गुजरता है,
उनके दरीचे का पर्दा भी नया लगता है.

छत के फूल भी अब मुरझाने लगे हैं,
सीढ़ियों पर भी अब जाले लगने लगे हैं.

बदल दिया है समय आने जाने का,
नज़र मिलने पर भी रंग अब बदलने लगे हैं.

Copyright @csahab 

Saturday, November 27, 2010

चंद अल्फाज़ तेरे लिये

कुछ पंक्तियाँ बस के यात्रा के दौरान मन में हिलोरे ले रही थी सोचा लिख लू आज आपके सामने प्रस्तुत है आशा करता हूँ आपको अच्छी लगेगी। इसको लिखे के पीछे कोई निजी अनुभव नहीं पर हाँ देखे हुए जरूर है । 

वो कहते हैं बदनाम हो गया हूँ
उनकी गली में आम हो गया हूँ।

मेरा आना अब उन्हें नागवार गुजरता है
उनके रोशनदान का पर्दा नया लगता है।

छत के फूल भी मुरझाने लगे हैं
सीढ़ियों पर जाले लगने लगे हैं।  

देख कर हमें रंग बदलने लगे हैं
हम भी अब उन्हें भूलने लगे हैं।  

© Csahab