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उफ्फ

यादों का घरोंदा

यादों का घरोंदा   ना नज़रे मिलाते है न झुकाते हैं, देख कर उन्हें बस देखते जाते हैं । ना बोल पाते है न चुप हो पाते हैं, देख कर उन्हें बस गुनगुनाये जाते हैं ।   ना कुछ लिख पाते हैं न कुछ मिटा पाते हैं, देख कर उन्हें बस लकीरें खींच पाते हैं ।   ना चल पाते हैं न बैठ...

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